रोटावेटर का प्रयोगः समय, लागत और ऊर्जा में काफी बचत

बदलते वक्त के साथ आज किसान खेती में नई-नई आधुनिक मशीनों का उपयोग करने लगे है जिससे खेती का काम आसान हो गया है। अब कम श्रम और कम लागत में खेती करना संभव हो गया है। वहीं उत्पादन भी पहले की अपेक्षा अधिक होने लगा है। जिससे किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हुई है। आज बाजार में खेत को तैयार करने के साथ ही फसल की बुवाई करने और कटाई तक की मशीनें बाजार में उपलब्ध हैं। इन्हीं में एक मशीन है रोटावेटर जो आपके खेती को आसान बनाने में आपकी सहायता करती है। खेत की तैयारी में इस मशीन का उपयोग बेहद सफल रहा है। इसमें खास बात ये है कि इसका संचालन आसान है और इसमें डीजल की खपत भी अपेक्षाकृत कम होती है। आज कई कंपनियां अलग- अलग प्रकार के रोटावेटर बना रही हैं, जो किसानों का खेती का काम आसान कर रही हैं।

रोटावेटर मशीन क्या हैः-

रोटावेटर एक ट्रैक्टर के साथ कार्य करने वाली मशीन है। जिसका मुख्य रूप से खेतों में उपयोग बीज की जुताई, बुआई और मिट्टी को खेती तैयार करने के लिए किया जाता है। इस मशीन से किसानों को समय, लागत और ऊर्जा में काफी बचत होती है।
रोटावेटर डिजाइनः- रोटावेटर को इस तरह से बनाया गया है कि यह किसी भी तरह की मिट्टी में आसानी से अपना कार्य कर सकता है। इसमें लगे ब्लेडों को खास तरीकों से डिजाइन किया गया है, जिससे की यह मिट्टी को आसानी से काट सके और साथ ही अन्य कार्य में सफल हो सकें। यह एक मजबूत मशीन है।

रोटावेटर के प्रकारः-

वर्तमान समय में दो प्रकार के रोटावेटर

सायल मास्टर रोटावेटरः-

सायल मास्टर रोटावेटर को किसी भी तरह की मिट्टी में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे कठोर और मुलायम दोनों तरह की मिट्टी के इस्तेमाल के लिए खासतौर से बनाया गया है। इसकी डिजाइन मजबूत होने के कारण इसमें कम्पन काम होता है्। यह अकेली ही ऐसी रोटावेटर मशीन है जिसमें दोनों तरफ बैरिंग लगे हैं यही कारण है जो यह सूखी और गीली मिट्टी दोनों पर ही काम करके अच्छे नतीजे देती है। अच्छी क्वालिटी होने की वजह से इसके रखरखाव पर भी कम खर्च आता है और इसका बाक्स कवर खेत में काम करते समय गीयर बाक्स को पत्थरों व दूसरी बाहरी चीजों से बचाता है।

टिलमेट रोटावेटरः-

इसको खास तरिके से डिजाइन किया गया है। इसमें बोरान स्टील के ब्लेड लगे होते हैं और एक गियर ड्राइव भी लगा होता है जिसके वजह से यह लंम्बे समय तक चलता है। इस में ट्रेनिंग बोर्ड को एडजस्ट करने के लिए ऑटोमैटिक स्प्रिंग लगे होते हैं।् इसका भी प्रयोग गीले और सूखे दोनों ही स्थानों पर कर सकते है।

रोटावेटर के महत्त्वः-

1- रोटावेटर को किसी भी प्रकार की मिट्टी की जुताई में प्रयोग किया जा सकता है।

2-इस को मिट्टी की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार समायोजित किया जा सकता है।

3-इसका उपयोग किसी भी फसल के लिए विशेष रूप से उथल.पुथल के लिए किया जा सकता है चाहे फसल गन्ना, कपास, केला और ज्वार आदि ही ना हो।

4-रोटावेटर के उपयोग में अन्य यंत्रो की अपेक्षा 15 प्रतिषत से 35 प्रतिषत तक ईंधन की बचत हो जाती है।

5-यह मिट्टी को तुरंत तैयार कर देता है जिससे पिछली फसल की मिट्टी की नमी का पूर्णतया उपयोग हो जाता है।

6-यह गीले क्षेत्रो में भी आसानी और कुषलता से कार्य कर सकता है।

7-यह शुष्क और गीली भूमि में खेती करने के लिए भी उपयुक्त है।

रोटावेटर का महत्वः-

रोटावेटर का उपयोग ट्रैक्टर के साथ किया जाता है।् इस मशीन का प्रयोग खेत की मिट्टी को अच्छी तरह से तैयार करने के लिए जाता है और यह मशीन बुआई के लिए खेतो को कम समय में तैयार कर देती है। रोटावेटर की सहायता से खेतो में पिछली फसल के कटने के बाद बचे अवशेषों को जड़ से खोदकर कर अच्छी तरह से खेतो में मिला देती है और इतना ही नहीं यह मशीन खेतो में बीज की बुआई के बाद उर्बरको और बीज को अच्छी तरह मिलाती है। इसकी सहायता से हम मिट्टी की 125 मि.मी से 1500 मि.मी तक की गहराई की जुताई कर सकते हैं। रॉटावेटर की सबसे बड़ी खासियत यह है की इससे जुताई करने के बाद खेतो में पाटा लगाने की जरुरत नहीं पड़ती है। इस यंत्र का प्रयोग किसी भी मिट्टी के जुताई में किया जा सकता है।

माकिर्ट में रोटावेटर की कीमत

बाजार में कई कंपनियां बेहतर और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रोटावेटर मशीन तैयार करती है। जैसे- सोनालिका, महिंद्रा, स्वैन, जग्गी, जॉन डियर, ऑक्स, मास्कीओ ,ओस मेष, आदि कंपनी रोटावेटर मशीन को बनाती है। भारतीय बाजार में रोटावेटर की कीमत लगभग 50 हजार से शुरू होकर 2.50 लाख’ रुपए तक है। जो किसान भाइयों के लिए बेहद किफायती हैं।

रोटावेटर पर सब्सिडीः-

किसानों के लिए रोटावेटर व कृषि से जुड़े अन्य उपकरणों पर अनुदान दिया जाता है। जिसे उन्हें कृषि यंत्रों को खरीदते समय किसी भी तरह की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े। जहां हरियाणा सरकार रोटावेटर मषीन पर 40 से 50 प्रतिषत अनुदान दे रही है वही पंजाब सरकार इस मषीन पर 80 प्रतिषत तक अनुदान दे रही है।