सुपर सीडर के इस्तेमाल से ऐसे हो सकती है बचत

भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां करीब 70 प्रतिशत आबादी कृषि और पशुपालन से जुड़ी हुई है। आज महंगे खाद, बीज के कारण खेती की लागत में बढ़ोतरी हो रही है उसकी तुलना में किसान की आमदनी में इतनी बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। इसके लिए जरूरी है कि खेती की लागत को कम किया जाए। सरकार भी इसी दिशा में प्रयास कर रही है। इसके लिए सरकार की ओर से किसानों को सब्सिडी पर बीज और खाद उपलब्ध कराया जाता है। वहीं कृषि मशीनों पर भी सब्सिडी का लाभ योजनाओं के तहत दिया जाता है। धान की बुवाई के बाद अब किसान गेहूं की बुवाई का काम शुरू करेंगे। इसके लिए उन्हें बीज व खाद की व्यवस्था के साथ ही उन्नत कृषि मशीनों की आवश्यकता होगी ताकि कम लागत पर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
बता दें कि धान की फसल की कटाई के बाद पराली की समस्या किसान के सामने खड़ी हो जाती है और किसान भाई गेहूं की बुवाई समय पर करने के कारण धान के अवशेषों को खेत में ही जला देते हैं जिसके कारण प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हो जाती है। हालांकि पराली जलाने पर सरकार की ओर से जर्माना और दंड दिया जाता है। पर किसान की मजबूरी होती है कि उसे खेत में ही पराली जलानी पड़ती है। धान की पराली की इस समस्या का हल सुपर सीडर मशीन से हो सकता है। इस मशीन की सहायता से किसान खेत की पराली को खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में कर सकते हैं जिससे कम खाद और उर्वरकों की आवश्यकता होती है और किसान के पैसों की बचत के साथ ही अधिक उत्पादन भी प्राप्त होता है।

सुपर सीडर:-

यह एक ऐसी मशीन है जिसमें रोटावेटर, रोलर व फर्टिसीडड्रिल लगा होता है। सुपर सीडर मशीन से धान, कपास के खेतों में गेहूं की सीधी बिजाई के साथ-साथ ट्रैक्टर के साथ करीब 12 से 18 इंच खड़ी पराली के खेत में जुताई भी की जा सकती हैं। रोटावेटर पराली को मिट्टी में दबाने, रोलर समतल करने व फर्टिसीडड्रिल खाद के साथ बीज की बुवाई करने का काम करता है।

खासियतः-

यह मशीन धान के खेतों में बिना खेत की जुताई किए हुए गेहूं की सीधी बिजाई अच्छी तरह से करती है,क्योंकि इस कृषि यंत्र में आगे की तरफ ब्लेड लगे होते हैं, जो कंबाइन से कटने के बाद बचे हुए ठुंठ को काटकर बारीक करके मिट्टी में मिला देते हैं। जिससे पराली को आग लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस मषीन की खासियत यह है कि एक बार की जुताई में ही बुआई हो जाती है। इस मशीन के पीछे एक रोलर लगा होता है। जो मिट्टी और फसल अवशेषों को हल्का दबा देता है।

सुपर सीडर मशीन के इस्तेमाल से क्या होगा लाभ

1- सुपर सीडर मशीन से खेत की एक बार जुताई करने से ही फसल अवशेष छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट जाते हैं और जमीन में मिल जाते हैं।

  1. इस मशीन से जुताई करने पर समय व श्रम की बचत होती है।
  2. इस मशीन से खेत एक बार की जुताई में ही तैयार हो जाता है। जबकि गेहूं की जुताई के लिए दो से चार जुताई की जाती है। इससे फसल की लागत में कमी आएगी।
  3. सुपर सीडर मशीन का इस्तेमाल करना बहुत ही आसान है इसे हर कोई किसान सामान्य प्रशिक्षण के प्रयोग कर सकता है।
  4. सुपर सीडर मशीन से जुताई व बुवाई करने पर फसल को कम खाद व उर्वरकों की आवश्यकता पड़ती है।
  5. सुपर सीडर मशीन से बुवाई करने पर फसलों को सिंचाई की आवश्यकता होती है।
  6. सुपर सीडर के इस्तेमाल से पौधों के गिरने की संभावना भी कम रहेगी।
  7. सुपर सीडर मशीन की सहायता से खेत में 5 टन से अधिक फसल अवशेष की अवस्था में भी आसानी से खेत में बुवाई की जा सकती है।
  8. सुपर सीडर मशीन से जुताई करने पर 5 प्रतिशत अधिक उत्पादन और लागत में 50 प्रतिशत की कमी की जा सकती है।
  9. सुपर सीडर खेत में 5 टन से अधिक फसल अवशेष की अवस्था में भी आसानी से खेत की बोआई कर सकता है।

कैसे कार्य करती है सुपर सीडर मशीन

सुपर सीडर फसल अवशेषों को छोटे छोटे टुकड़ों में काट कर खेत में फैला देता है। मिट्टी के नीचे दब जाने से यह फसल अवशेष सडक कर जैविक खाद बन जाते हैं। सुपर सीड से गेहूं की सीधी बोआई हो जाती है। इसमें जहां बीज गिरना होता है वहीं खुदाई होती है। बीज के साथ उर्वरक भी चला जाता है। इस तरह खाद की कम लगता है। सुपर सीडर से सीधी बोआई में बीज, पानी, खाद और मजदूरी की भी बचत होती है। जबकि पैदावार में इजाफा होता है।

मार्किट में कीमतः-

यह मशीन एक एकड़ जमीन की जुताई एक से दो घंटे में कर करने के कारण मशीन की भारतीय बाजार में कीमत करीब 2 से सवा 2 लाख रुपये तक है।

सब्सिडीः-

हालांकि यह मशीन किसानों के लिए कारगर तो है, लेकिन महंगी कीमत होने के कारण छोटी जोत के किसानों तक नही पहुच पा रही है। इस कारण हरियाणा सरकार इस मषीन पर 40 से 50 प्रतिषत और पंजाब सरकार 80 प्रतिषत अनुदान दे रही है।