बरसात का मौसम साबित हुआ वरदान, कई राज्यों में पराली जलाने के केसों में कमी।

इस बार पराली के केस कम करने में बारिष वरदान साबित हो रही है। जहां हर साल पराली के केस में बढ़ोतरी होने से लोगो को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था वही इस मुददे को लेकर केन्द्र सरकार के साथ राज्य सरकारें भी बहुत परेषान थी। प्रमुख धान उत्पादक पंजाब में 2020 के दौरान 15 सितंबर से 11 अक्टूबर तक 2957 जगहों पर पराली जलाने के मामले आ चुके थे। लेकिन इस साल यानी 2022 में इसी अवधि में अब तक सिर्फ 763 केस ही आए हैं। यानी करीब एक चैथाई मामले ही रह गए हैं। साल 2021 के (828) के मुकाबले भी मामले घटे हैं। दरअसल, इस साल धान कटाई के समय बारिश ने सरकार का साथ दिया। फसल भीग जाने की वजह से अभी मामले कम हैं।

यही हाल हरियाणा का भी है। जहां पर इस साल 11 अक्टूबर तक पराली जलाने के महज 83 केस सैटेलाइट की पकड़ में आए हैं। साल 2021 में 15 सितंबर से 11 अक्टूबर तक हरियाणा में 247 और 2020 में 411 मामले आ चुके थे। मौसम ने इस साल प्रदूषण रोकने की कोशिश में लगी सरकारों का साथ दिया है।

अगर हम बात करें उत्तर प्रदेश की तो पिछले छह दिन से खराब मौसम व बरसात के कारण प्रदूषण के मोर्चे पर सरकार को कुछ राहत मिली है। यहां 2021 में 11 अक्टूबर तक धान की पराली जलाने के 178 मामले आए थे। जबकि इस साल यानी 2022 में अब तक सिर्फ 80 केस आए हैं। जबकि 2020 में 214 मामले आ चुके थे।

वही राजस्थान में पराली जलाने के आकड़े की बात करे तो राजस्थान प्रमुख धान उत्पादक सूबा नहीं है। यहां फसल अवशेष जलाने के मामले इस साल भी पिछले वर्ष के बराबर ही हैं। साल 2021 में 11 अक्टूबर तक 10 केस आए थे और इस बार भी इतने ही केस हैं। हालांकि, 2020 में इसी अवधि में 146 मामले आ चुके थे।

वही मध्य प्रदेश का हाल हमने जाना तो पाया तो बारिश की वजह से मध्य प्रदेश में भी फसल अवशेष जलाने के केस काफी कम हो गए हैं। साल 2021 में 11 अक्टूबर तक 29 मामले रिकॉर्ड किए गए थे, जबकि इस साल महज 7 केस ही हैं। इस साल सभी राज्यों में बारिश के साथ ही पराली जलने की घटनाएं कम हो रही हैै। कही ना कही बरसात के अलावा सरकार द्वारा चलाए गए विशेष अभियान का असर है कि इस बार पराली जलाने के मामले कम सामने आ रहे हैं।

खेत में पड़े पराली के बंडल इस बात के गवाह हैं कि किसानों ने पराली का प्रबंधन किया है। साथ ही पराली बेचकर अपनी आय बढ़ाई है। इससे पर्यावरण भी बचा है, दूसरा जमीन की उर्वरता भी बनी रही है। कृषि विभाग की तरफ से अपील है कि अपने आस पास के पड़ोसी किसानों को भी पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करें।