अच्छी कमाई के लिये पशुपालक करें इन बकरियों की वैरायटियों चयन,

देश में बकरी पालन का व्यवसाय बहुत तेजी से बढ़ने का कारण कम लागत, आसानी से रख-रखाव और बढ़िया मुनाफा हैं। लेकिन बकरी फार्म शुरू करने से पहले अच्छी नस्लों का चयन करना एक महत्वपूर्ण काम है। पशुपालक विशेषज्ञों की मानें तो बकरी की नस्लों का चयन स्थान के हिसाब से करना चाहिए। अन्य मवेशियों की तुलना में बकरी पालन में नुकसान का खतरा काफी कम है। पशुपालन व्यवसाय शुरू करने से पहले, यदि आप अपने क्षेत्र की वर्षा, उपलब्ध चारा और दाना और पानी के अनुसार बकरी की नस्ल चुनते हैं, तो कुशन लाभ की संभावना भी बढ़ जाती है। हालाँकि, यदि आप मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में रहते हैं तो वहां के हिसाब से वहीं पहाड़ी राज्यों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश से हैं तो वहां की भौगोलिक परिस्थियों के हिसाब से बकरी की नस्ल का चयन करें। इसलिए आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बेहतरीन बकरियों की वेरायटियों के बारे में विस्तार से बताएंगे।

विशेषज्ञ बकरियों की इन सात नस्लों को बेस्ट मानते हैः-

  • ब्लैक बंगाल बकरीः- बकरी की इस नस्ल के पालन के लिए बिहार, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल की जलवायु अच्छी मानी जाती है। इस बकरी का पालन मांस-चमड़ा और दूध, दोनों के लिए किया जाता है।
  • पंतजा बकरीः- हिरन की तरह दिखने वाली इस नस्ल की बकरी के पालन के लिए उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश का ठंडा मौसम अच्छा माना जाता है। लोग इसका पालन दूध, मांस और रेशे के लिए करते हैं।
  • सिरोही बकरीः- सिरोही बकरी का पालन राजस्थान के सिरोही, अजमेर, बांसवाड़ा, राजसमंद और उदयपुर और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में होता है। इस नस्ल का पालन दूध और मांस के लिए किया जाता है।
  • बरबरी बकरी:- बकरी की इस नस्ल को पालने के लिए उत्तर प्रदेश की जलवायु को सर्वोत्तम माना जाता है। बरबरी बकरियों को सबसे अधिक पालन आगरा, अलीगढ़ मंडल के पशुपालक करते हैं। इस बकरी का पालन केवल मांस के लिए होता है।
  • बीटल बकरीः- पंजाब के पठानकोट, अमृतसर, गुरुदासपुर और जम्मू के आसपास पाई जाने वाली इस नस्ल को दूध, मांस, चमड़ा और रेशा, चारों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। प्रजनन की बात करें तो इस नस्ल में 12-18 महीने के बीच गर्भाधान होता है।
  • उस्मानाबादीः- इस नस्ल का भी पालन ज्यादातर मांस के लिए किया जाता है। महाराष्ट्र के उस्मानाबाद, परभणी, अहमदनगर और सोलापुर के आसपास का परिवेश और राज्य की जलवायु इस नस्ल के पालन के लिए अच्छी मानी जाती है। काले रंग की ये बकरी साल में दो बार बच्चे देती है।
  • जमुनापारीः- जमुनापारी बकरी पालन के लिए चंबल संभाग का क्षेत्र सबसे उपयुक्त माना जाता है। इन नस्ल से दूध और मांस, दोनों का उत्पादन होता है। लंबे कानों वाली ये बकरी एक दिन में 2.5-3 लीटर दूध देती है।

विशेषज्ञ बकरी पालन व्यवसाय शुरू करने से पहले अच्छी नस्ल के चुनाव का सुझाव देते हैं,अगर पशुपालक बकरी पालन शुरू करने जा रहे हैं तो अपने क्षेत्र में उपलब्ध चारा, दाना-पानी के अनुसार मवेशियों की संख्या और नस्ल का चुनाव करें, इससे मुनाफा ज्यादा होने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

पशुपालक बाड़े का ऐसे करें प्रबंधनः-

बकरियां कुदने-फांदने में माहिर होती हैं, इसलिए बाड़े की दीवार की उंचाई कम से कम 5-6 फिट तक रखें। यदि आप खेत में बकरी पालन कर रहे हैं तो तारों की बाड़ को मजबूत खंबों के सहारे बांधें, इससे शिकारी कुत्ते और शियार-भेड़ियो की पहुंच से आपके मवेशी सुरक्षित रहेंगे। बकरियों की संख्या के अनुसार बाड़े का क्षेत्रफल रखें। एक बकरी को कम से कम 3 वर्गमीटर के क्षेत्रफल निर्धारित करें। इसके साथ ही बाड़े की स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखना आवश्यक है, बाड़ा हवादार रखें। कम जगह में अधिक बकरियां रखने से उनके बीमार होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इससे दूध और मांस उत्पादन में कमी हो सकती है।